May 24, 2024
Vinash kale vipreet buddhi Meaning in hindi

विनाश काले विपरीत बुद्धि का मतलब क्या होता है ? – Vinash kale vipreet buddhi Meaning in hindi

Vinash kale vipreet buddhi :- आपने अक्सर कई लोगों के मुंह से Vinashakale vipareetha buddhi वाक्यांश को सुना होगा। एक बहुत ही पुराना वाक्यांश है, जो अक्सर लोग किसी गलत चीज को दर्शाने के लिए करते हैं।

लेकिन क्या आप विनाश काले विपरीत बुद्धि का पूरा अर्थ जानते हैं ? यदि नहीं तो आज का यह लेख आपके लिए ही है।

आज के इस लेख में हम Vinashakale vipareetha buddhi वाक्यांश के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करेंगे और समझेंगे कि इस वाक्यांश को किसने कहा था और इसका प्रयोग कब और क्यों किया जाता है।


विनाश काले विपरीत बुद्धि का अर्थ क्या है ? – Vinash kale vipreet buddhi Meaning in hindi

विनाश काले विपरीत बुद्धि एक प्रकार का वाक्यांश है जो मुख्य रूप से हिंदू धर्म में इस्तेमाल किया जाता है। यह वाक्यांश संस्कृत भाषा से लिया गया है। यह एक वाक्यांश होने के साथ-साथ एक श्लोक भी है।

इस लोक के रूप में हम इसे “विनाश काले विपरीत बुद्धि:” कहते हैं। इसमें विनाशकाले का अर्थ होता है विनाश का समय और विपरीत बुद्धि का अर्थ होता है व्यक्ति की बुद्धि उल्टी हो जाना और सोचने समझने की शक्ति खो देना।

तो इसका पूरा अर्थ यह है, कि जब किसी व्यक्ति का विनाश का समय आता है तो वह अपनी सोचने समझने की शक्ति को खो देता है और गलत निर्णय लेने लगता है।

साथी हम इसे इस प्रकार से भी समझ सकते हैं, कि विनाश के समय में हमारी मानसिकता में गलत धारणा भी उत्पन्न होने लग जाती है। और हम यह समझते हैं, कि हमारी गलत अवधारणाओं के कारण ही हमारे विनाश का समय आया है।


विनाश काले विपरीत बुद्धि किसने कहा था ?

विनाश काले विपरीत बुद्धि इस लोक को चाणक्य के नीति शास्त्र किताब से लिया गया है। इसका अर्थ यह है, कि विनाश काले विपरीत बुद्धि वाक्यांश को चाणक्य ने कहा था। इसका पूरा श्लोक आपको चाणक्य के नीति शास्त्र के 16 अध्याय में मिल जाएगा।


विनाश काले विपरीत बुद्धि फुल श्लोक संस्कृत में क्या है ?

अगर हम विनाश काले विपरीत बुद्धि श्लोक के बारे में बात करें तो यह दो लाइन का श्लोक है जो आपको चाणक्य ने रेत के नीति शास्त्र की किताब में मिलेगी फुलस्टॉप इसका पूर्ण श्लोक कुछ इस प्रकार है :-

निर्मिता केन दृष्टपूर्वा श्रूयते हेममयी कुरङ्गी

तथाऽपि तृष्णा रघुनन्दनस्य विनाशकाले विपरीतबुद्धिः।।

इस श्लोक का शाब्दिक अर्थ कुछ इस प्रकार से है –

किसने पहले सुनहरे हिरन को बनाया या देखा या सुना नहीं है? फिर भी रघुनंदन के नाश के समय तृष्णा बुद्धि के विपरीत है”।

इस श्लोक के अर्थ को चाणक्य जी ने श्री राम का उदाहरण लेकर समझाया है जो की इस प्रकार है –

“किसी ने सुनहरे पर वाला हिरण नहीं बनाया ना इसे किसी ने पहले देखा और ना ही किसी ने इसके बारे में सुना। फिर भी यह भगवान राम की प्यास थी जिसने उनकी बुद्धि को उनके हित के खिलाफ काम करने के लिए प्रेरित किया।

यानी कि श्री राम माता सीता की याचना पर सुनहरे हिरण की तलाश में निकल गए थे। और अंततः रावण द्वारा सीता जी का अपहरण कर लिया गया”।

तो इसका अर्थ यही है, कि जब किसी के ऊपर भी विनाश का समय आता है तो वह व्यक्ति कितना भी समझदार क्यों ना हो उसकी बुद्धि फिर जाती है।


विनाश काले विपरीत बुद्धि का उदाहरण क्या होगा ?

तो आइए हम आपको विनाश काले विपरीत बुद्धि को उदाहरण के माध्यम से समझाते हैं।

हालांकि चाणक्य जी ने अपने इस लोक में श्री राम का उदाहरण लेकर इस वाक्यांश को समझाया है। परंतु हम यहां पर एक अन्य उदाहरण के माध्यम से इसे समझते हैं।

हम यहां पर फिर से रामायण का ही उदाहरण लेते हैं। तो जैसे कि हम सभी जानते हैं रावण एक महान विद्वान पंडित था लेकिन जब रावण के विनाश काल का समय आया तब महान शक्तिशाली विद्वान रावण की भी बुद्धि भ्रष्ट हो गई और उसने माता सीता का अपहरण कर लिया।

हालांकि रावण में यह क्षमता थी, कि वह श्रीराम की अर्धांगिनी माता सीता को पहचान सके लेकिन उसकी बुद्धि ने उसका साथ नहीं दिया।

केवल उसी अपहरण के कारण रावण को मृत्यु का सामना करना पड़ा। यही निकलता है कि अगर किसी भी इंसान के साथ कुछ बुरा घटित होने वाला है और उस इंसान का बुरा समय आ गया है तो एक समझदार व्यक्ति की बुद्धि काम करना बंद कर देती है।


विनाश काले विपरीत बुद्धि का उपयोग कब और क्यों किया जाता है ?

अक्सर ज्यादातर हिंदू धर्म के लोग विनाश काले विपरीत बुद्धि शब्द का इस्तेमाल करते हैं। इस वाक्यांश का उपयोग खासकर ऐसे समय में किया जाता है जब हम किसी दूसरे व्यक्ति को कोई गलत निर्णय लेते हुए देख रहे हो।

इस वाक्यांश का उपयोग हम तब कर सकते हैं, जब कोई व्यक्ति गलत निर्णय ले रहा हो और हमें उसे रोकना हो। गलत निर्णय लेने वाले व्यक्ति को यह एहसास दिलाता है कि हमें कोई भी फैसला बहुत ही सोच समझकर और सावधानीपूर्वक लेना चाहिए। क्योंकि कोई भी एक गलत निर्णय हमारे विनाश का समय बन सकता है।

तो कुछ इस तरह से हम इस वाक्यांश का उपयोग कर सकते हैं और इसे समझ सकते हैं।


FAQ’S :- 

Q1. तथापि कृष्णा रघुनंदनस्य का अर्थ क्या है ?

Ans- तथापि कृष्णा रघुनंदनस्य का अर्थ “फिर भी तृष्णा रघुनंदन के बुद्धि के विपरीत है” होता है। या इसका शाब्दिक अर्थ है, 
जिसकी पूरी व्याख्या हमने इस लेख में बताई है।

Q2. विनाश काले विपरीत बुद्धि श्लोक in English में क्या होगा ?

Ans- अगर हम इस श्लोक को इंग्लिश में अनुवाद करें, तो इसका अर्थ Who has never made or seen or heard 
of a golden dear, Yet at the time of destruction the thirst of the delight of the Raghus 
was reversed निकलेगा।

Q3. विनाश काले विपरीत बुद्धि कोट्स बताइए ?

Ans- इस वाक्यांश से संबंधित कई सारे कोट्स एवं अनमोल वचन बनाए गए हैं। जैसे “बुद्धि फैलने के कारण विनाश काल तय है

Q4. विनाश काले विपरीत बुद्धि निबंध कैसे लिखें ?

Ans- अगर आप इस विषय पर निबंध लिखना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको इसका अर्थ भली-भांति समझना होगा। 
उसके बाद आप सबसे पहले इसकी उत्पत्ति के बारे में लिखें। उसके बाद इस वाक्यांश से संबंधित श्लोक को समझाएं। 
उसके बाद आप इससे संबंधित कुछ उदाहरण भी दे सकते हैं और निबंध लिख सकते हैं।

निष्कर्ष :-

आज के इस लेख में हमने जाना कि Vinashakale vipareetha buddhi का अर्थ क्या होगा? उम्मीद है कि आपको इस वाक्यांश का अर्थ पूरी तरह से समझ आ पाया होगा।

अगर आपको इसी प्रकार के किसी अन्य वाक्यांशों का अर्थ समझना हो या फिर इस विषय पर प्रश्न पूछना हो तो आप हमें कमेंट करके पूछ सकते हैं। यदि आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे अपने अन्य दोस्तों के साथ भी जरूर साझा करें।


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